मोदी की लहर
मोदी की लहर
मोदी से मोदीखाना हुए
लगा कुर्सी का चस्का,
वोट पाने की होड़ में
लगे लगाने मस्का ।
चाय पे चर्चा की,
पब्लिसिटी पे खर्चा
हिंदुत्व के मुद्दे पर
भरे बनारस से परचा ||
कभी लौह पुरुष तो कभी दिव्य पुरुष
क्या क्या लिए अवतार,
अपने मुँह मियां मिट्ठू बनते
बाकी सब हैं बेकार ।
विकाश का दोतक कहते खुद को
प्रगति का मशीन,
पर झूठ - सच के बीच का
फासला तो होता बहुत महीन ।
लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूर |
जो तौर तरीका आपने चुना उससे
तो दिल्ली लागत बहुत दूर ।

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