Thursday, 24 April 2014

इश्क़ बिहार से

कौन कहता है कौन कहता है
न होगी हमारी लालू की जीत
विजय पताका लिए हाथ में
फ़तेह गा रहे है अभिनन्दन गीत ।

मुँह पे छायी है मुस्कान
पुरे होने चले है जो उनके अरमान
किये थे वादा लालू जो उनसे
जीतेंगे तो पच्चीसों भैंसे
मिलेगा फ़तेह को ऐसा उपहार
जब लालू को मिलेगा फिर से बिहार ।

सच्चाई क्या है कोई न जाने
फ़तेह हो गए है लालू के दीवाने
होगी कृपा लालू की उनपर
सोंच कर ही पाव न टिक रहे ज़मीन पर |

मन में लड्डू फुट रहे है
धनवान बनने की आशा जो है
क्या सचमुच छप्पर फाड़ के देंगे लालू
अब तो  बस यही चिंता सताती है ।

पहले हाथ सने रहते थे गोबर से
अब वे सानेंगे घी से गोबर
पहले छाती थी बीस इंच की
अब वो फूल के हो गयी है दोबर |

Wednesday, 23 April 2014

चाय पे चर्चा

(सन्दर्भ - केजरीवाल की गुजरात यात्रा )



मोदी : बहुत जल्दी में हैं लगता है अरे बैठिये ना |
केजरीवाल : मेरे सवालों के जवाब कहाँ है
मोदी : बहुत भोला बनते है आप भी अरे इतना टाइम ऑफिस में बैठ के आप का वेट करेंगे | उधर आपने मीडिया में सवाल पूछा और इधर  हमको भी खबर मिल गयी | सॉरी, आपका काम नहीं हुआ लेकिन फर्स्ट टाइम पधारे है हमारे गरीब खाना पर , चाय तो पी के  जाइये बहुत अच्छा मिलता है हमारे गुजरात में
केजरीवाल : किसने कह दिया आपसे कि  हम जा रहे है  २४ घंटे हमारे सवाल आपका पीछा करेंगे उनके जवाब दिए बिना आप  हिल भी नहीं सकते
मोदी : तो  क्या आप हमको गुजरात में चैलेंज कर रहे है ?
केजरीवाल : अब तो आप बस  देखते जाइये हम आपके गढ़ में क्या - क्या करते है
मोदी : कुछ नहीं कर पाओगे केजरी , तुम्हरे जैसे कई आये और गए हमरा कुछ नहीं बिगाड़ सके
केजरीवाल : इस ग़लतफहमी  में मत रहना मोदी जी जब जिस दिन जरुरत पड़ेगी धरने पे बैठ जायेंगे और याद रखना हमारी चाय बहुत कड़वी होती है |

मोदी की लहर




मोदी की लहर

मोदी  से मोदीखाना हुए
लगा कुर्सी का चस्का,
वोट पाने की होड़ में
लगे लगाने मस्का

चाय पे चर्चा की,
पब्लिसिटी पे खर्चा
हिंदुत्व के मुद्दे पर
भरे बनारस से परचा ||

कभी लौह पुरुष तो कभी दिव्य पुरुष
क्या क्या लिए अवतार,
अपने मुँह मियां मिट्ठू बनते
बाकी सब हैं  बेकार


विकाश का दोतक कहते खुद को
प्रगति का मशीन,
पर झूठ - सच के बीच का
फासला तो होता बहुत महीन


लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूर |
जो तौर तरीका आपने चुना उससे
तो दिल्ली लागत बहुत दूर ।