इश्क़ बिहार से
कौन कहता है कौन कहता है
न होगी हमारी लालू की जीत
विजय पताका लिए हाथ में
फ़तेह गा रहे है अभिनन्दन गीत ।
मुँह पे छायी है मुस्कान
पुरे होने चले है जो उनके अरमान
किये थे वादा लालू जो उनसे
जीतेंगे तो पच्चीसों भैंसे
मिलेगा फ़तेह को ऐसा उपहार
जब लालू को मिलेगा फिर से बिहार ।
सच्चाई क्या है कोई न जाने
फ़तेह हो गए है लालू के दीवाने
होगी कृपा लालू की उनपर
सोंच कर ही पाव न टिक रहे ज़मीन पर |
मन में लड्डू फुट रहे है
धनवान बनने की आशा जो है
क्या सचमुच छप्पर फाड़ के देंगे लालू
अब तो बस यही चिंता सताती है ।
पहले हाथ सने रहते थे गोबर से
अब वे सानेंगे घी से गोबर
पहले छाती थी बीस इंच की
अब वो फूल के हो गयी है दोबर |
न होगी हमारी लालू की जीत
विजय पताका लिए हाथ में
फ़तेह गा रहे है अभिनन्दन गीत ।
मुँह पे छायी है मुस्कान
पुरे होने चले है जो उनके अरमान
किये थे वादा लालू जो उनसे
जीतेंगे तो पच्चीसों भैंसे
मिलेगा फ़तेह को ऐसा उपहार
जब लालू को मिलेगा फिर से बिहार ।
सच्चाई क्या है कोई न जाने
फ़तेह हो गए है लालू के दीवाने
होगी कृपा लालू की उनपर
सोंच कर ही पाव न टिक रहे ज़मीन पर |
मन में लड्डू फुट रहे है
धनवान बनने की आशा जो है
क्या सचमुच छप्पर फाड़ के देंगे लालू
अब तो बस यही चिंता सताती है ।
पहले हाथ सने रहते थे गोबर से
अब वे सानेंगे घी से गोबर
पहले छाती थी बीस इंच की
अब वो फूल के हो गयी है दोबर |
